"रक्षा बंधन" रक्षाबंधन पर बहन अपने भाई को राखी बांधती हैं। भाई अपनी बहन को सदैव साथ निभाने और उसकी रक्षा के लिए आश्वस्त करता है। यह परम्परा हमारे भारत में काफी प्रचलित है, और ये श्रावण पूर्णिमा का बहुत बड़ा त्यौहार है। रक्षाबंधन अर्थात् संरक्षण का एक अनूठा रिश्ता, जिसमें बहनें अपने भाइयों को राखी का धागा बाँधती है, रक्षा बंधन तो पहले से ही था, यह रक्षा का एक रिश्ता है। इसलिए, रक्षा बंधन ऐसा त्यौहार है, जब सभी बहनें अपने भाइयों के घर जाती हैं,और अपने भाइयों को राखी बांधती हैं, और कहती हैं "मैं तुम्हारी रक्षा करूंगी और तुम मेरी रक्षा करो"। और ये कोई ज़रूरी नहीं है, कि वे उनके अपने सगे भाई ही हों, वह अन्य किसी को भी राखी बाँधकर बहन का रिश्ता निभाती हैं।तो ये प्रथा इस देश में काफी प्रचलित है, रक्षाबंधन पर राखी बांधने की हमारी सदियों पुरानी परंपरा रही है। प्रत्येक पूर्णिमा किसी न किसी उत्सव के लिए समर्पित है। सबसे महत्वपूर्ण है कि आप जीवन का उत्सव मनाये। सभी भाईयों और बहनों को एक दूसरे के प्रति प्रेम और कर्तव्य का पालन और रक्षा का दायित्व लेते हुए ढेर सारी शुभकामना के स...
जो लोग अपनी मनमर्जी से भक्ति करते हैं यानी कि शास्त्रविधि त्यागकर जो भक्ति करते हैं उनको मोक्ष प्राप्त नहीं होता है लेकिन अन्य सिद्धिया प्राप्त हो जाती है और उसी को ही साधक सब कुछ मान बैठता है और उनका गलत उपयोग करके मनुष्य जन्म का नाश कर देता है। सतभक्ति कैसे करें जानने के लिए देखों शाम07:30बजे साधना चैनल पर।
" जन्माष्टमियो को मनाने से क्या लाभ हैं या नहीं"? जन्माष्टमी का त्योहार भादप्रद महीने की अष्टमी तिथि के दिन मनाया जाता है, श्री कृष्ण का जन्म का भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि को हुआ था। कृष्ण जी ने रोहिणी नक्षत्र में जन्म लिया था। इसीलिए अगर अष्टमी तिथि के दिन रोहिणी नक्षत्र होता है, तो यह एक बहुत ही शुभ और विशेष संयोग माना जाता है। आज के मानव को पता नहीं क्या हो गया है कि हकीकत को भुला जा रहा है क्योंकि यदि श्री कृष्ण रोहिणी, नक्षत्र औऱ विशेष सयोंग में जन्मे थे तो उन्होंने इतनी लड़ाइयां क्यों नहीं रोकी औऱ कइयों को खुद ने मारा है। इससे जाहिर है कि पुर्ण परमात्मा श्री कृष्ण जी नहीं थे क्योंकि कबीर साहेब जी ने हमेशा हिंदू मुस्लिम को एक साथ रहने का संदेश दिया है।आपसी वैर भाव को समाप्त करवाया है।जी बिल्कुल सिद्ध हुआ कि सर्व शक्तिशाली तो कोई और हैं जी।आगे पढ़ो जी। समाज में श्री कृष्ण जी की कई संस्थान चल रही है लेकिन सभी गलत तरीके से ही भक्ति करवा रहे हैं क्योंकि सही भक्ति कैसे करनी है ये शास्त्रों में वर्णित है लेकिन प...
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